सुनो मीडिया मालिकों... मजीठिया का हक देकर कालाधन बर्बाद होने से बचा लो

जयपुर। देशभर में फिलहाल बात सिर्फ नोटों की हो रही है। चाहे विपक्ष नोटबंदी पर जमकर हल्ला कर रहा हो या फिर आम-आदमी नोट के लिए कतार में लगा हुआ हो। सारे टीवी चैनल और समाचार-पत्र नोटबंदी की खबरों से अटे हुए हैं। इस बीच ये भी खबर आ रही है कि नोटबंदी की खबर से कालाधन छुपाकर रखने वालों के लिए परेशानी हो गई है। इन्हीं कालाधन रखने वालों की फेहरिस्त में मीडिया मालिक भी हैं, जिनकी कहीं भी बात नहीं की जा रही है। इन मीडिया मालिकों ने बेईमानी, मक्कारी, सरकारी कृपा, कर्मचारियों का शोषण करके, मजीठिया वेज बोर्ड का हक मारकर यानी येन-ेकेन प्रकारेण अकूत सम्पदा रूपी कालाधन जमा कर रखा है।

चाहे दैनिक जागरण हो, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला, दैनिक हिन्दुस्तान या फिर अन्य कोई अखबार इनके पास भी बहुत बड़ी मात्रा में कालाधन जमा है। जिस तरह नोटबंदी के बाद देशभर के व्यापारी, नेता, बिल्डर सहित कालाधन जमा रखने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। कुछ दिन बाद मीडिया मालिक भी परेशान होंगे। अभी ये सब चुप्पी साधे हुए हैं।
मजीठिया के लिए संघर्ष कर रहे सभी साथियों का इन मीडिया मालिकों से कहना है कि आपका कालाधन 31 दिसम्बर के बाद खराब हो जाएगा। पुराने नोट इस अवधि के बाद चलेंगे नहीं। लाख कोशिशों के बाद भी पूरे कालेधन को सफेद नहीं करा पाओगे। पुराने नोटों की कुछ खेप तो फिर भी बच ही जाएगी और उसकी औकात रद्दी से ज्यादा नहीं होगी। इसलिए मजीठिया साथियों को एरियर के रूप में पुराने नोट ही दे दो, वे तो उसे भी लेने को तैयार हैं। इससे मीडिया मालिकों को दो फायदे हैं। एक तो उनका कई करोड़ों रुपए का कालाधन बर्बाद होने से बच जाएगा और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से भी मुक्ति मिल जाएगी। अब गेंद मीडिया मालिकों के पाले में है, वे मजीठिया साथियों को उनका हक देकर अपने ब्लैक मनी को रद्दी होने से बचाते हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट के कोपभाजन का सामना करने को तैयार रहते हैं।