...तो प्रत्येक मीडिया मालिक पर लगेगा 500  करोड़ का फटका

जयपुर। अभी हाल ही सुप्रीम कोर्ट में हुई मजीठिया मामले की सुनवाई के दौरान माननीय जज साहब ने यह कहा था कि चूंकि, राशि का विवाद सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता और यह श्रम आयुक्त का मामला है। इसलिए किस कर्मचारी का मजीठिया के हिसाब से वेतन और एरियर बन रहा है। इसका फैसला श्रम आयुक्त करेंगे। इसलिए उन्होंने 17-2 (राशि पर विवाद होने पर लेबर कोर्ट में रेफरेंस भेजना) की कार्यवाही करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि मीडिया मालिक अवमानना की कार्यवाही से बच गए हैं। 20 जे पर लिखित आदेश आते ही मीडिया मालिकों पर अवमानना लग जाएगी। उसके बाद उन्होंने कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया तो उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी।

इस तरह से बरगला रहे हैं कर्मचारियों को

अब मीडिया मालिक इस तथ्य को तोड़-मरोड़कर उन कर्मचारियों को बरगला रहे हैं, जिन्होंने अभी तक अपना हक नहीं मांगा है और केस करने वाले ऐसे साथी जिनको किसी भी प्रकार से प्रताडि़त नहीं किया गया है। मीडिया मालिक ऐसे कर्मचारियों से कह रहे हैं कि अब मामला श्रम आयुक्त के यहां आ गया है और अब हमारी जीत पक्की है। सुप्रीम कोर्ट ने केस श्रम आयुक्तों के हवाले कर दिया है और कर्मचारी अब मजीठिया भूल जाए। वे कह रहे हैं कि श्रम आयुक्त के यहां तो 10 -20 साल केस चलता है और इतने में कर्मचारी भी हताश हो जाएगा। यदि आपको नौकरी करनी है तो चुपचाप कर लो। मजीठिया की शिकायत करने से कोई फायदा नहीं, क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट अब इसकी सुनवाई नहीं करेगा। इन मीडिया मालिकों में राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण समेत सभी शामिल हैं।

छोटे कर्मचारियों को बना रहे निशाना

राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर और दैैनिक जागरण समेत कई मीडिया मालिकों ने बाकायदा अपने मैनेजरों और स्थानीय सम्पादकों को इस काम में लगा रखा है। प्रबंधन के ये गुर्गे कमजोर और निचले पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को पहले निशाना बना रहे हैं। उन्हें बुलाकर यह समझाया जा रहा है कि श्रम आयुक्त के यहां केस आ गया है,सुप्रीम कोर्ट अब सुनवाई नहीं करेगा। परिवार का पालन-पोषण करना है तो नौकरी करते रहो, शिकायत करने में दिमाग मत लगाओ। चूूंकि, यह तबका ज्यादा पढ़ा-लिखा होता नहीं है, इसलिए प्रबंधन की बात पर विश्वास आसानी से कर लेता है।

सभी को देना पड़ा एरियर तो लगेगा 500 करोड़ का फटका

ऐसे कई फोन मीडिया होल्स के पास आए और इसके बारे में पूछा। मीडिया होल्स ऐसे सभी साथियों से कहना चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की कार्यवाही बंद नहीं हुई है। उसी से बचने की मीडिया मालिक कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि जो श्रम आयुक्त के यहां शिकायत करेगा, मजीठिया उसी को मिलेगा। इसलिए मीडिया मालिकों की किसी बात में नहीं आएं और अपना हक पाने के लिए श्रम आयुक्त के यहां शिकायत लगाएं। मीडिया मालिक किसी भी सूरत में आपका हक नहीं मार सकते हैं। खास बात यह है कि मीडिया मालिकों ने आपके हक के करोड़ों रुपयों पर कुण्डली मार रखी है और उसका मोटा ब्याज भी खा रहे हैं। वहीं आपको देने में उनको जोर आ रहा है। यदि मीडिया मालिकों को सभी कर्मचारियों को एरियर देना पड़ गया तो प्रत्येक मीडिया मालिक पर करीब 500 करोड़ रुपए का भार पड़ रहा है। वहीं वेतन के नाम पर भी हर माह उनका बजट करोड़ों बढ़ जाएगा। इसलिए वे कर्मचारियों को भड़काकर शिकायत नहीं करने का दबाव बना रहे हैं। आप स्वयं सोचिए, यदि आपकी एरियर की राशि कम होती तो आपको ये कभी का दे देते। उसे बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में करोड़ों रुपए देकर वकील खड़ा नहीं करते। इसलिए साथियों अब भी समय है, श्रम आयुक्त के यहां शिकायत करो और अपना हक लो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आपको कुछ नहीं मिलेगा।